Maithili Thakur election result- जानें भाजपा की मैथिली ठाकुर की सीट का हाल
बिहार की राजनीति इस बार बेहद दिलचस्प मोड़ पर है। दरभंगा जिले की अलीनगर विधानसभा सीट इस समय पूरे राज्य में चर्चा का केंद्र बनी हुई है।
इस सीट से बीजेपी ने मशहूर लोकगायिका मैथिली ठाकुर को उम्मीदवार बनाया है। लोक परंपरा और संस्कृति में गहरी पहचान रखने वाली मैथिली ठाकुर का राजनीति में उतरना खुद में बड़ी खबर है।
उनके सामने आरजेडी (राष्ट्रीय जनता दल) के बिनोद मिश्रा और जन सुराज पार्टी के बिप्लव कुमार चौधरी मैदान में हैं। कुल मिलाकर अलीनगर सीट पर इस बार 12 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय और रोमांचक बन गया है।
अब तक की स्थिति: BJP उम्मीदवार आगे
2025 बिहार विधानसभा चुनाव की मतगणना जारी है। ताजे अपडेट के मुताबिक, अब तक हुए छह राउंड की काउंटिंग में मैथिली ठाकुर को 22,000 से अधिक वोट मिल चुके हैं।
वे आरजेडी उम्मीदवार बिनोद मिश्रा से लगभग 8,544 वोट से आगे हैं। शुरुआती रुझानों से बीजेपी खेमे में खुशी का माहौल है, क्योंकि यह बढ़त लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है।
सुबह के शुरुआती राउंड्स में दोनों उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर थी, लेकिन दोपहर तक मैथिली ठाकुर ने मजबूत बढ़त बना ली।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, उन्हें 14,635 से ज्यादा वोट मिले हैं, जबकि उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी आरजेडी के बिनोद मिश्रा कुछ हजार वोटों के अंतर से पीछे हैं।
हाई-प्रोफाइल सीट बनी अलीनगर
अलीनगर विधानसभा सीट दरभंगा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। यह सीट पारंपरिक रूप से राजनैतिक रूप से सक्रिय रही है, लेकिन इस बार यह सीट हाई-प्रोफाइल इसलिए हो गई क्योंकि यहां से कला और संस्कृति की दुनिया की जानी-मानी शख्सियत मैथिली ठाकुर चुनाव मैदान में हैं।
लोकगायिका से नेता बनी मैथिली ठाकुर युवा पीढ़ी में काफी लोकप्रिय हैं। उनके मंच से चुनाव लड़ने की घोषणा ने ही इस सीट को मीडिया की सुर्खियों में ला दिया था।
उनकी सादगी और सामाजिक कार्यों के कारण उन्हें इलाके में बड़ी संख्या में युवाओं और महिलाओं का समर्थन मिला है। यही कारण है कि अलीनगर इस बार सिर्फ राजनीतिक लड़ाई नहीं, बल्कि संस्कृति और जनता के विश्वास का भी प्रतीक बन गया है।
दिलचस्प मुकाबला: परंपरा बनाम अनुभव
अलीनगर का यह चुनाव परंपरा और अनुभव के बीच टक्कर की तरह देखा जा रहा है।
एक तरफ नई पीढ़ी की प्रतिनिधि और पहली बार राजनीति में उतरी मैथिली ठाकुर हैं, जिनकी छवि मेहनती, संस्कारी और जनता से जुड़ी हुई है। दूसरी ओर आरजेडी के बिनोद मिश्रा हैं, जो लंबे समय से राजनीति में सक्रिय और अनुभवी नेता माने जाते हैं।
जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार बिप्लव चौधरी भी इस मुकाबले में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं, हालांकि अब तक के आंकड़ों में उनका प्रदर्शन सीमित ही रहा है।
ALSO READ – Bijli Vibhag Vacancy 2025: बिजली विभाग में नौकरी का मौका, ऐसे करें अप्लाई
जनता में उत्साह और जिज्ञासा
मतगणना के दौरान अलीनगर और आसपास के इलाकों में काफी हलचल देखी जा रही है।
लोग टीवी, मोबाइल और सोशल मीडिया पर हर राउंड का अपडेट देख रहे हैं। कई जगह मैथिली ठाकुर के समर्थक ढोल-नगाड़ों और झंडों के साथ घूमते दिख रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मैथिली ठाकुर ने अपने प्रचार के दौरान संगीत और संस्कृति के ज़रिए जनता से जुड़ने की कोशिश की, जो उन्हें अन्य उम्मीदवारों से अलग बनाता है। उन्होंने हर गांव में जाकर लोगों से संवाद किया और विकास का भरोसा दिलाया।
मतगणना का रुझान और भविष्य की संभावना
हालांकि मतगणना अभी पूरी नहीं हुई है, लेकिन अब तक के रुझान बताते हैं कि बीजेपी की मैथिली ठाकुर बढ़त बनाए हुए हैं।
यदि यह रुझान कायम रहता है, तो यह सीट बीजेपी के लिए बड़ी जीत साबित हो सकती है। इससे पार्टी को मिथिला क्षेत्र में मजबूती मिल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मैथिली ठाकुर की लोकप्रियता, उनकी स्वच्छ छवि, और युवा मतदाताओं में पकड़ इस बढ़त का कारण है।
उनकी उम्मीदवारी ने बीजेपी को एक नई जन-अंतरात्मा की छवि दी है, जो पारंपरिक राजनीति से अलग दिखती है।
अलीनगर का राजनीतिक महत्व
अलीनगर विधानसभा सीट भले ही आकार में छोटी हो, लेकिन इसका राजनीति में बड़ा महत्व है।
यह सीट दरभंगा और आसपास के इलाकों में बीजेपी और RJD के जनाधार की परीक्षा मानी जाती है।
2025 के चुनाव में यहां से जो भी दल जीतता है, उसका असर पूरे मिथिलांचल की राजनीति पर दिखेगा।
निष्कर्ष
अलीनगर का यह चुनाव न सिर्फ़ दो उम्मीदवारों का मुकाबला है, बल्कि यह नया संकेत भी देता है कि अब बिहार की राजनीति में संस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों की जगह बढ़ रही है।
मैथिली ठाकुर की बढ़त दिखाती है कि जनता उन चेहरों को अपनाने के लिए तैयार है, जो ईमानदारी और जमीनी जुड़ाव के साथ राजनीति में आए हैं।
मतगणना अभी जारी है, नतीजे थोड़ी देर में तय करेंगे कि जनता का फैसला किस ओर जाता है।
लेकिन इतना तय है कि इस बार अलीनगर ने बिहार की राजनीति को एक नया मोड़ दे दिया है — जहां संगीत, संस्कृति और सेवा ने राजनीति को एक मानवीय छवि दी है।
READ MORE – Delhi Mahipalpur Blast में धमाके की आवाज: असली सच्चाई क्या है?