बिहार विधानसभा चुनाव 2025: भोजपुरी स्टार खेसारी लाल यादव पीछे, बीजेपी की छोटी कुमारी ने बढ़त बनाई
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में छपरा विधानसभा सीट सबसे अधिक चर्चा में रही है।
यह मुकाबला इसलिए खास था क्योंकि भोजपुरी फिल्मों के सुपरस्टार खेसारी लाल यादव पहली बार राजनीति में उतरे हैं। उन्होंने आरजेडी (राष्ट्रीय जनता दल) के टिकट पर चुनाव लड़ा, जबकि उनके सामने बीजेपी की उम्मीदवार छोटी कुमारी हैं। शुरुआती दौर में यह मुकाबला दिलचस्प नजर आया, लेकिन अब काउंटिंग में खेसारी लाल यादव लगातार पिछड़ते दिखाई दे रहे हैं।
अब तक का नतीजा: बीजेपी आगे, खेसारी पीछे
छपरा विधानसभा सीट पर अब तक छह राउंड की मतगणना पूरी हो चुकी है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बीजेपी की छोटी कुमारी को 18,555 वोट मिले हैं, जबकि आरजेडी उम्मीदवार खेसारी लाल यादव को 16,461 वोट मिले हैं।
इस तरह छोटी कुमारी 2,094 वोटों की बढ़त बनाए हुए हैं।
निर्दलीय उम्मीदवार राखी गुप्ता 861 वोट के साथ तीसरे स्थान पर हैं, जबकि जन सुराज पार्टी के जय प्रकाश सिंह को 783 वोट मिले हैं।
यानी मुकाबला साफ तौर पर बीजेपी और आरजेडी के बीच सिमट चुका है।
भोजपुरी स्टार खेसारी लाल का पहला चुनाव
भोजपुरी फिल्मों और संगीत की दुनिया में मशहूर खेसारी लाल यादव पहली बार चुनावी मैदान में उतरे हैं।
उनका असली नाम शत्रुघ्न यादव है और वे छपरा इलाके के ही रहने वाले हैं।
लोगों के बीच उनकी फैन फॉलोइंग बहुत बड़ी है, इसलिए जब आरजेडी ने उन्हें टिकट दिया तो इस सीट पर तुरंत सुर्खियां बढ़ गईं।
पहले चर्चा थी कि आरजेडी इस सीट से उनकी पत्नी चंदा देवी को टिकट देगी, लेकिन आख़िरी वक्त में फैसला बदल गया और पार्टी ने खुद खेसारी लाल यादव को उम्मीदवार बना दिया।
उनके आने के बाद छपरा विधानसभा चुनाव मनोरंजन और राजनीति का संगम बन गया।
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छोटी कुमारी: बीजेपी की नई लेकिन मजबूत उम्मीदवार
दूसरी ओर बीजेपी ने इस सीट से छोटी कुमारी को टिकट दिया है।
भले ही वह पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ रही हैं, पर राजनीति में नई नहीं हैं।
वह पहले जिला परिषद की अध्यक्ष रह चुकी हैं और संगठन में उनकी अच्छी पकड़ रही है।
उनके पति धर्मेंद्र साह बीजेपी के जिला महामंत्री हैं। छोटी कुमारी वैश्य समुदाय से आती हैं, जिसकी आबादी छपरा क्षेत्र में काफी अधिक है। यही वजह है कि उन्हें सामाजिक समर्थन भी मजबूत मिला है।
छपरा सीट बीजेपी का पारंपरिक गढ़ मानी जाती रही है। पार्टी ने यहां 2010, 2015 और 2020 तीनों चुनावों में जीत दर्ज की थी।
इन वजहों से छोटी कुमारी को पहले से ही बढ़त माना जा रहा था, जो अब मतगणना में स्पष्ट हो रही है।
शुरुआती राउंड से लेकर अब तक की काउंटिंग
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पहला और दूसरा राउंड: दोनों उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला रहा।
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तीसरा राउंड: खेसारी लाल यादव पीछे हो गए और बीजेपी उम्मीदवार 2,380 वोटों से आगे बढ़ गईं। छोटी कुमारी को 9,447 वोट मिले जबकि खेसारी को 7,067 वोट।
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चौथा राउंड: छोटी कुमारी ने बढ़त बढ़ाकर 3,000 वोट तक की। उन्हें 12,611 वोट मिले जबकि खेसारी को 9,526 वोट।
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छठा राउंड (नवीनतम स्थिति): बीजेपी उम्मीदवार 18,555 वोट के साथ पहले स्थान पर हैं, जबकि आरजेडी प्रत्याशी खेसारी लाल यादव 16,461 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर हैं।
हर राउंड के साथ छोटी कुमारी की बढ़त थोड़ी-थोड़ी बढ़ती जा रही है, जिससे बीजेपी समर्थकों में उत्साह दिख रहा है।
स्थानीय माहौल और जनता की प्रतिक्रिया
छपरा इलाका भोजपुरी संस्कृति का केंद्र माना जाता है, इसलिए इस बार जनता में खास जोश देखा गया।
खेसारी लाल यादव के मैदान में उतरने से माहौल उत्सव जैसा हो गया था। गांव-गांव में लोग खेसारी के गानों और फिल्मों की चर्चा करते थे।
लेकिन राजनीति में लोकप्रियता को वोटों में बदलना आसान नहीं होता।
लोग बताते हैं कि भले ही खेसारी यादव को स्टार की तरह सम्मान मिला, लेकिन बीजेपी की संगठनात्मक ताकत और स्थानीय मुद्दों पर पकड़ ने छोटी कुमारी को फायदा दिलाया।
कई मतदाताओं का कहना था कि छोटी कुमारी ने विकास और महिला सशक्तिकरण पर अच्छा काम किया है, जबकि खेसारी लाल को राजनीतिक अनुभव की कमी थी।
इसलिए मतदाताओं ने अनुभवी चेहरों पर भरोसा जताया।
क्यों महत्वपूर्ण है छपरा सीट
छपरा विधानसभा सीट का राजनीतिक महत्व बहुत बड़ा है।
यह सीट बीजेपी और आरजेडी दोनों दलों के लिए प्रतिष्ठा की बनी हुई है।
छपरा से पहले से बीजेपी का मजबूत आधार रहा है और अगर छोटी कुमारी यह सीट जीत जाती हैं, तो यह पार्टी के लिए बड़ी राहत होगी।
वहीं यदि खेसारी लाल जीत जाते, तो यह आरजेडी के लिए बड़ा प्रतीकात्मक संदेश होता कि पार्टी अब युवा और सांस्कृतिक चेहरों को आगे लाकर जनता का विश्वास जीत सकती है।
लेकिन अब तक के रुझान बीजेपी के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं।
नतीजा क्या संकेत देता है
छपरा का यह चुनाव दिखाता है कि बिहार की राजनीति में सिर्फ पहचान या लोकप्रियता से जीत नहीं मिलती।
यहां संगठन, जातीय समीकरण और जमीनी पकड़ भी उतनी ही जरूरी है।
बीजेपी की छोटी कुमारी की बढ़त यह साबित करती है कि गांव-गांव में पार्टी की पकड़ मजबूत है और महिला उम्मीदवारों को भी जनता का भरोसा मिल रहा है।
खेसारी लाल यादव के लिए यह पहला अनुभव है। अगर वे जीत नहीं पाते, तब भी यह चुनाव उनके लिए एक सीख होगी।
उनकी लोकप्रियता के कारण वे आगे भी राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।
निष्कर्ष
छपरा विधानसभा सीट पर मुकाबला वाकई दिलचस्प था।
एक तरफ भोजपुरी दुनिया के स्टार खेसारी लाल यादव थे, दूसरी ओर बीजेपी की स्थानीय नेतृत्व वाली छोटी कुमारी।
मतदान के बाद अब तक के रुझान यह दिखा रहे हैं कि छोटी कुमारी ने 2000 से अधिक वोटों की बढ़त बना ली है और जीत की उम्मीद की जा रही है।
अंतिम परिणाम कुछ देर में साफ हो जाएंगे, लेकिन इतना तय है कि यह चुनाव बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बना रहेगा।
इस मुकाबले ने साबित किया कि जनता अब सिर्फ नाम के नहीं, बल्कि काम के उम्मीदवारों को प्राथमिकता दे रही है।