क्या आपके घर में कोई बच्चा है जो दिन भर इंस्टाग्राम या यूट्यूब पर लगा रहता है? तो ये खबर आपके लिए है। 28 सितंबर 2026 को सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वो आईटी नियमों में बदलाव करके 18 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया अकाउंट खोलने से रोकने की तैयारी में है।
यानी सोशल मीडिया बैन की बात अब सिर्फ़ चर्चा नहीं रही। लेकिन ये बैन असल में क्या है, कब लगेगा, और आप पर क्या असर पड़ेगा? आइए जानते हैं।
आखिर हुआ क्या?
सुप्रीम कोर्ट में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई चल रही थी। ये याचिका “Just Rights for Children Alliance” नाम के संगठन ने दाखिल की है। सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच कर रही थी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा कि केंद्र सरकार आईटी नियमों में बदलाव करेगी, ताकि सोशल मीडिया कंपनियों पर ये कानूनी ज़िम्मेदारी हो कि वो नाबालिगों को अकाउंट न बनाने दें।
सरकार और कोर्ट का तर्क क्या है?
इसके पीछे दो मुख्य बातें सामने आई हैं:
- कॉन्ट्रैक्ट का तर्क: भारतीय कानून में 18 साल से कम उम्र का व्यक्ति कोई अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) नहीं कर सकता। सोशल मीडिया अकाउंट खोलते समय हम “नियम और शर्तें” मानते हैं, जो एक तरह का कॉन्ट्रैक्ट है। सरकार का कहना है कि नाबालिगों के साथ ऐसे समझौते वैध नहीं हैं।
- विदेशी नियम का मुद्दा: जस्टिस बागची ने कहा कि कई कंपनियों ने अमेरिका के नियम, जहाँ बच्चों के अकाउंट पर अलग सीमाएँ हैं, भारत में भी लागू कर रखे हैं, जो भारतीय कानून के हिसाब से ठीक नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट और सरकार ने किन खतरों की बात की?
याचिका और सुनवाई में बच्चों के लिए कई खतरे गिनाए गए, जैसे ऑनलाइन ग्रूमिंग (बच्चों को बहला-फुसलाकर फँसाना), यौन शोषण, ट्रैफिकिंग, साइबरबुलिंग, डेटा का गलत इस्तेमाल और उम्र के हिसाब से अनुचित कंटेंट।
अभी क्या पक्का है और क्या नहीं?
यहाँ सबसे ज़रूरी बात है, क्योंकि कई जगह इसे “बैन लग गया” की तरह पेश किया जा रहा है।
पक्का क्या है:
- केंद्र ने कोर्ट में कहा है कि वो आईटी नियमों में बदलाव करेगा।
- कोर्ट ने संकेत दिया है कि अगर प्लेटफ़ॉर्म पालन नहीं करते तो वो निर्देश दे सकता है।
अभी तय नहीं है:
- नया नियम अभी लागू नहीं हुआ है। ये सिर्फ़ इरादा और तैयारी है।
- उम्र की जाँच कैसे होगी, ये साफ़ नहीं है।
- जो बच्चे पहले से अकाउंट चला रहे हैं, उनका क्या होगा, ये भी तय नहीं है।
- बच्चे नकली उम्र डालकर इसे कैसे बायपास करेंगे, इसका हल भी बाकी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक मामले की अगली सुनवाई करीब चार हफ्ते बाद हो सकती है।
क्या माता-पिता की इजाज़त से अकाउंट बन सकेगा?
सरकारी वकील ने कोर्ट में कहा कि शैक्षणिक वेबसाइट की सदस्यता माता-पिता की सहमति से ली जा सकती है। यानी पढ़ाई से जुड़े प्लेटफ़ॉर्म को शायद अलग नज़र से देखा जाए। लेकिन सामान्य सोशल मीडिया ऐप्स के लिए सहमति का नियम क्या होगा, ये अभी साफ़ नहीं है। [VERIFY: नियम का ड्राफ्ट आने पर देखें]
कुछ रिपोर्ट्स में उम्र के अलग-अलग स्तरों (8-12, 12-16, 16-18) वाली योजना का भी ज़िक्र है, लेकिन इसकी पुष्टि आधिकारिक दस्तावेज़ से नहीं हुई है, इसलिए इसे पक्का न मानें। इसे भी पढ़े
दूसरे देशों में क्या हो रहा है?
ऑस्ट्रेलिया ने पहले ही एक कानून बनाया है जिसमें कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट पर रोक लगाई गई है, और ये लागू हो चुका है। मेरी जानकारी के मुताबिक वहाँ की सीमा 16 साल है, न कि 18। [VERIFY: सटीक उम्र और लागू होने की तारीख देख लें]
अगर भारत ये कदम उठाता है, तो वो उन देशों की बढ़ती सूची में शामिल होगा जो बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सख्ती कर रहे हैं।
आम परिवारों पर इसका क्या असर हो सकता है?
अभी सब कुछ अनुमान है, लेकिन कुछ संभावनाएँ ये हैं:
- माता-पिता की भूमिका बढ़ेगी। बच्चे के अकाउंट के लिए आपकी मंज़ूरी या निगरानी ज़रूरी हो सकती है।
- उम्र की जाँच के लिए ज़्यादा डेटा देना पड़ सकता है। आधार या दूसरे पहचान पत्र माँगे गए, तो निजता का सवाल उठेगा।
- बच्चे दूसरे रास्ते खोज सकते हैं, जैसे झूठी उम्र या माँ-बाप का अकाउंट इस्तेमाल करना।
- यूट्यूब जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर क्या होगा, ये भी सवाल है, क्योंकि पढ़ाई और मनोरंजन दोनों के लिए बच्चे इसका इस्तेमाल करते हैं।
[APNA EXPERIENCE YAHAN: अगर आपके घर में या आपके आस-पास कोई बच्चा सोशल मीडिया चलाता है, तो 2-3 लाइन में अपना असली अनुभव या राय लिखें]
तब तक माता-पिता क्या कर सकते हैं?
नियम आने का इंतज़ार किए बिना ये कदम अभी उठाए जा सकते हैं:
- बच्चे के फोन में पेरेंटल कंट्रोल और स्क्रीन टाइम की सीमा लगाएँ।
- बच्चे से खुलकर बात करें कि ऑनलाइन क्या सुरक्षित है और क्या नहीं।
- बच्चे के अकाउंट प्राइवेट रखवाएँ और अनजान लोगों की रिक्वेस्ट न मानने को कहें।
- अगर कुछ गलत हो, तो बच्चे को डाँटने के बजाय उसकी बात सुनें, ताकि वो अगली बार आपसे छिपाए नहीं।
निष्कर्ष
सोशल मीडिया बैन पर सरकार और सुप्रीम कोर्ट का रुख साफ़ है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को गंभीरता से लिया जाएगा। लेकिन नियम अभी बना नहीं है, और उम्र की जाँच, पुराने अकाउंट और बायपास जैसे बड़े सवाल बाकी हैं। इसलिए घबराने की नहीं, बल्कि आगे की खबरों पर नज़र रखने की ज़रूरत है।
आपको क्या लगता है, क्या 18 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखना सही फैसला है? या माता-पिता की निगरानी काफ़ी है? कमेंट में अपनी राय बताइए।
स्रोत: Inc42, Business Standard, MEDIANAMA (ये मुख्य रूप से Times of India की रिपोर्ट पर आधारित हैं। publish से पहले इनके लिंक नीचे जोड़ें।)
