आपके फोन, लैपटॉप, कार और यहाँ तक कि वॉशिंग मशीन के अंदर भी एक छोटी-सी चीज़ होती है जिसके बिना ये कुछ नहीं चलते, यानी सेमीकंडक्टर चिप। अब तक भारत को ज़्यादातर चिप बाहर से मँगवानी पड़ती थीं। इसी निर्भरता को कम करने के लिए सरकार ने Semicon 2.0 योजना शुरू की है, और सितंबर 2026 में दिल्ली में हुए SEMICON India कार्यक्रम में ये चर्चा के केंद्र में रही।
तो Semicon 2.0 क्या है, इसमें कितना पैसा लग रहा है और ये आपके लिए क्यों मायने रखती है? आइए सरल भाषा में समझते हैं।
Semicon 2.0 क्या है?
Semicon 2.0 भारत सरकार के सेमीकंडक्टर मिशन का दूसरा चरण है। केंद्रीय कैबिनेट ने इसे 15 जुलाई 2026 को मंज़ूरी दी। इसके लिए करीब ₹1.275 लाख करोड़ (₹1,27,500 करोड़) की राशि तय की गई है।
आसान शब्दों में, ये योजना सिर्फ़ चिप की फैक्ट्रियाँ लगाने तक सीमित नहीं है। इसका मकसद चिप बनाने से जुड़ी पूरी चेन को देश में खड़ा करना है, यानी डिज़ाइन से लेकर मशीनें, मटीरियल, पैकेजिंग और ट्रेनिंग तक।
पहले चरण में क्या हुआ?
भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2021 में ₹76,000 करोड़ के बजट के साथ शुरू हुआ था। इसके तहत अब तक 12 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट मंज़ूर हुए हैं, जो छह राज्यों में फैले हैं। इनमें कुल निवेश की प्रतिबद्धता ₹1.64 लाख करोड़ से ज़्यादा की है, और तीन इकाइयों में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है।
यानी नींव तैयार हो गई है, और अब Semicon 2.0 उस पर पूरी इमारत खड़ी करने की कोशिश है।
आल्सो रीड –
Semicon 2.0 के 6 मुख्य स्तंभ
योजना छह हिस्सों पर टिकी है:
- चिप डिज़ाइन: भारतीय स्टार्टअप और कंपनियों को अपनी चिप और उनका IP (बौद्धिक संपदा) बनाने में मदद।
- मशीनें और मटीरियल: चिप बनाने में लगने वाली मशीनें, केमिकल और गैसें भारत में ही बनाने को बढ़ावा।
- नई फैब्स: चिप बनाने वाली और फैक्ट्रियाँ लगाना।
- एडवांस्ड पैकेजिंग: चिप की असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग की क्षमता बढ़ाना।
- रिसर्च और डेवलपमेंट: नई तकनीक पर शोध को समर्थन।
- प्रतिभा विकास: इंजीनियरों और तकनीशियनों को प्रशिक्षित करना।
SEMICON India 2026 में क्या दिखा?
नई दिल्ली के यशोभूमि (द्वारका) में 17 से 19 सितंबर तक चले इस पाँचवें संस्करण की थीम थी “Silicon to Systems: Building the Ecosystem”। इसमें 600 से ज़्यादा कंपनियों ने हिस्सा लिया, और स्टार्टअप पवेलियन, वर्कफ़ोर्स डेवलपमेंट पवेलियन और हैकाथॉन भी हुए।
बड़ी घोषणाओं में Applied Materials की अगले दस वर्षों में भारत में करीब 5 अरब डॉलर के निवेश की योजना शामिल रही, जो रिसर्च, सप्लायर विकास और टैलेंट पर केंद्रित है। इसके अलावा Semicon 2.0 के तहत लगभग ₹1 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिलने की बात कही गई है, जिनके अगले दो-तीन सालों में ज़मीन पर उतरने की उम्मीद है।
आपके लिए इसका क्या मतलब है?
1. नौकरियाँ: योजना का लक्ष्य लगभग एक लाख नई नौकरियाँ पैदा करना और चिप फैक्ट्रियों के लिए एक लाख तकनीशियन तैयार करना है। अगर आप इंजीनियरिंग, ITI या डिप्लोमा कर रहे हैं, तो ये क्षेत्र आपके लिए नए मौके खोल सकता है।
2. स्टार्टअप को मौका: सरकार कम से कम 200 चिप-डिज़ाइन कंपनियों और स्टार्टअप को सहारा देना चाहती है। पहले चरण में 105 स्टार्टअप को मदद मिली, जिनमें से 20 ने करीब ₹800 करोड़ का वेंचर कैपिटल जुटाया।
3. सस्ती और भरोसेमंद सप्लाई (उम्मीद): जब देश में ही चिप बनेंगी, तो विदेशी सप्लाई रुकने का असर कम होगा। कुछ साल पहले चिप की कमी से गाड़ियों और फोन की डिलीवरी में देरी हुई थी, ऐसी दिक्कतें घट सकती हैं।
चुनौतियाँ भी हैं
खबर जितनी अच्छी है, उतना ही ज़रूरी है ये समझना कि रास्ता आसान नहीं है:
- समय लगेगा। निवेश प्रस्ताव और असली उत्पादन में फर्क होता है, और फैक्ट्रियों को तैयार होने में सालों लगते हैं।
- बड़ी कंपनियों से मुकाबला। ताइवान, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देश दशकों से इस क्षेत्र में हैं।
- कुशल लोगों की कमी। चिप बनाना बेहद बारीक काम है, और उसके लिए प्रशिक्षित लोग तैयार करना अपने आप में बड़ी चुनौती है।
- बिजली, पानी और साफ़ माहौल। चिप फैक्ट्री को लगातार बिजली और बहुत शुद्ध पानी चाहिए होता है।
इसलिए किसी भी घोषणा को “अभी सब कुछ बदल गया” की तरह न देखें। असली नतीजे आने में वक्त लगेगा।
निष्कर्ष
Semicon 2.0 भारत के लिए सिर्फ़ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता की तरफ़ बढ़ता कदम है। ₹1.275 लाख करोड़ के बजट, छह स्तंभों और रोज़गार के बड़े लक्ष्य के साथ ये उम्मीद तो जगाती है। लेकिन इसकी सफलता इस बात पर टिकी है कि घोषणाएँ कितनी तेज़ी से ज़मीन पर उतरती हैं।
आपको क्या लगता है, क्या भारत चिप बनाने में दुनिया के बड़े देशों की बराबरी कर पाएगा? कमेंट में अपनी राय ज़रूर बताइए।
